श्री भगवान नेमिनाथ की आरती

आरती नेमि प्यारे की, कि जिनवर चंद्र दुलारे की
फेर लिया तोरन से रथ को, सुना जब पशुवन के दुःख को
हटाया जग से जब दिल को, धार लिया प्रभु ने तपवन को
मोक्ष की राह किनारे की, कि जिनवर चन्द्र दुलारे की….

किसी कि एक नहीं मानी, कि जाकर गिरी दीक्षा की ठानी
अष्ट कर्मो की कर हानी, बने प्रभु आत्म ग्यानी
कहुं क्या राजुल प्यारे की, कि जिनवर चंद्र दुलारे की ।। टेक ।।
आरती नेमि प्यारे की, कि जिनवर चंद्र दुलारे की

आरती सब मिलकर गावे, आपको निशदिन ही ध्यावे
दर्श को भव भव में चाहे, और अविचल भक्ती पावे
लाज रख सेवक प्यारे की, कि जिनवर चंद्र दुलारे की ।। टेक ।।
आरती नेमि प्यारे की, कि जिनवर चंद्र दुलारे की….

श्री नेमिनाथ भगवान की जय

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